समाजसेवी पत्रकार डी पी गुप्ता ने सुल्तानपुर एआरएम को बस स्टेशन परिसर में स्थित हनुमान मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए ज्ञापन सौंपा
न्यू गीतांजलि टाइम्स सुल्तानपुर। उत्तर प्रदेश परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के पीआरओ सोनू सिंह के निर्देश पर पत्रकार एकता संघ के राष्ट्रीय प्रभारी डी पी गुप्ता एडवोकेट ने बस स्टेशन परिसर में स्थित श्री हनुमान मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए परिवहन विभाग सुल्तानपुर के एआरएम नगेंद्र पांडेय से मुलाकात किया। इस दौरान उन्हें जिला अधिकारी को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा। सुलतानपुर परिवहन विभाग के एआरएम नगेंद्र पांडेय को सौंपे अपने ज्ञापन में समाजसेवी पत्रकार डी पी गुप्ता एडवोकेट ने लिखा कि सुलतानपुर उ प्र के बस स्टेशन परिसर में उत्तरी बाऊन्ड्री से लगा एक श्री हनुमान जी, श्री दुर्गा जी व श्री शिव जी का अति प्राचीन मंदिर है जो कि बहुत पुराने पीपल के वृक्ष के नीचे स्थित है। वर्तमान समय में मंदिर जमीन में लगभग डेढ़ फिट धंस चुका है और उसकी नींव बहुत कमजोर हो गई है इस कारण कभी भी मंदिर धराशाई हो सकता है। नया बस स्टेशन परिसर बनने के बाद मंदिर बिल्डिंग के पिछवाड़े वाले हिस्से में हो कर पूरी तरह उपेक्षित हो गया है। वर्तमान में जर्जर मंदिर के दक्षिण तरफ बड़ी बिल्डिंग और उत्तरी तरफ ऊंची दीवार है। पश्चिम की तरफ शौचालय और उत्तर दिशा की तरफ बसों का जमावड़ा रहता है इस वजह से कोई मंदिर नहीं जा पाता । भक्तों के न आने से मंदिर की देखभाल की व्यवस्था दयनीय हो गई है। मंदिर की उत्तरी दिवाल से सट कर बढ़ैयाबीर मार्ग पर नगर पालिका की खुली नाली बनी है। उस सड़क से गुजरने वाले राहगीर जाने अनजाने में नाली के साथ मंदिर की दिवाल पर भी लघुशंका कर देते हैं इससे मंदिर की प्रतिष्ठा पर ठेस पहुच रही है इसके अलावा नाली से भयंकर बदबू आने से वहां पूजा-पाठ में बहुत दिक्कत होती रहती है। ऐसी स्थिति में हिंदू धर्म का सम्मान करते हुए जनहित में निम्न लिखित न्यायोचित मांग संज्ञान में लेकर उसका उचित समाधान कराने की मांग किया गया। 1- यह कि उक्त परिवहन विभाग के सरकारी मंदिर का जीर्णोद्धार कराये जाने हेतु मंदिर का नवनिर्माण कराया जाय। 2- यह कि परिवहन विभाग अपने विभागीय मंदिर में नियमित पूजा-पाठ, रखरखाव व पुजारी के वेतन हेतु बजट जारी करे। 3- यह कि स्थानीय मोहल्ले के वृद्ध महिला पुरुष बच्चे भी मंदिर में आ सकें इस के लिए मंदिर की उत्तरी दिवाल में एक सुरक्षित गेट लगाया जाए। 4- यह कि यदि किसी वजह से परिवहन विभाग को उक्त मंदिर की देखभाल जीर्णोद्वार कराने में असुविधा हो तो लिखित आदेश जारी कर स्थानीय धार्मिक समाजसेवियों को उक्त मंदिर की जिम्मेदारी सौंप दें ताकि आम जनता के आर्थिक सहयोग से उक्त मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जा सके ।
