शस्य विज्ञान कृषि परिक्षेत्र पर वर्मीकम्पोस्ट की हारर्वेटिंग
सुलतानपुर, न्यू गीतांजलि टाइम्स। कमला नेहरू संस्थान के शस्य विज्ञान विभाग द्वारा वर्मीकम्पोस्ट का हारर्वेटिंग शुरू हो गया। इस मौके पर प्राचार्य प्रो. आलोक कुमार सिंह ने बताया कि वर्मीकम्पोस्ट पोषण पदार्थो से युक्त एक उत्तम जैव उर्वरक है जो केंचुए के विशेष प्रजाति के द्वारा वनस्पति एवं भोजन के कचरे आदि को विद्यटित करके बनाई जाती है। संस्थान के फरीदीपुर कैम्पस में डा. सुशील कुमार श्रीवास्तव की देख-रेख में वेडविधि से वर्मीकम्पोस्ट का यूनिट लगा है जिसमें केचुए की आईसिनिया फेटिडा प्रजाति का प्रयोग किया गया है। डॉ श्रीवास्तव नें बताया कि केचुआ खाद लगभग 2 महीन में तैयार हो जाती है। साथ ही साथ उपस्थित छात्रों को हारर्वेटिंग की मुख्यतः तीन विधिया (1 हस्तविधि (2 स्क्रीन विधि (3 काऊ डंग बाल विधि के बारे में विस्तृत जानकारी भी दिया गया। इन तीनों विधियों से हारर्वेटिंग करना छात्रों को बताया गया जिससे छात्र भविष्य में इसका लाभ उठा सके। डॉ सुशील ने कहा कि वर्मीकम्पोस्ट में नाइट्रोजन की मात्रा 1.2 से 2.5 प्रतिशत फास्फोरस की मात्रा 0.9 से 1.7 प्रतिशत एवं पोटाश की मात्रा 1.5 से 2.5 प्रतिशत होती है। इस खाद का मुख्यतः उपयोग सब्जी वर्गीय फसले एवं फल वृक्ष में ज्यादा लाभदायक होता है। शस्य विज्ञान के प्राध्यापकों नें बताया कि वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन प्राविधि से भविष्य में किसानों को प्रशिक्षित करने की रणनीति तैयार की जा रही है । अभी हमारे यहाँ केचुआ खाद एवं वर्मीकल्चर उपलब्ध है जिसे उचित मूल्य पर संस्थान के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर कृषि संकाय के प्रभारी डा. नवीन विक्रम सिंह ने कहा कि परास्नातक छात्र केचुआ खाद की जानकारी करके घर में ही कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते है। इस मौके पर शस्य विज्ञान के प्राध्यापक डा. अंकित सिंह मृदा विज्ञान के प्राध्यापक डा. कुमार अंशुमान सिंह एवं शस्य विज्ञान के परास्नातक छात्र वेदांत कुमार सिंह रजनीश चतुर्वेदी यश विक्रम सिंह एवं मृत्युंजय सिंह आदि उपस्थित रहे।
