विद्या भारती जन शिक्षा समिति के प्रान्तीय प्रधानाचार्य योजना बैठक के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों में हुआ प्रधानाचार्यो का प्रशिक्षण

विद्या भारती जन शिक्षा समिति के प्रान्तीय प्रधानाचार्य योजना बैठक के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों में हुआ प्रधानाचार्यो का प्रशिक्षण

सुलतानपुर, न्यू गीतांजलि टाइम्स विद्या भारती जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश द्वारा  सरस्वती शिक्षा मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक  योजना बैठक के दूसरे दिन रविवार को  कार्ययोजना बैठक के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत  प्रचारक  काशी प्रान्त रमेश जी का पाथेय प्रधानाचार्यो को प्राप्त हुआ। अपने उद्बोधन में उन्होने कहा कि किसी भी विद्यालय के उत्थान में उसके प्रधानाचार्य की अहम भूमिका होती है। प्रधानाचार्य को अहर्निश विद्यालय एवं समाज के उत्थान के लिए निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि  सर्वे भवंतु सुखिन: की कामना करने वाले हम सब अपनी योजना से पीछे होने के कारण, आज समाज संकुचित होकर अपने परिवार तक सीमित हो गया है । जिसके कारण देश पीछे जा रहा है। देश में अनेक ऋषि मुनियों द्वारा अनेक प्रकार की खोज,गणित के सूत्र अंको का ज्ञान खगोल विद्या आदि अनेक प्रकार के खोज किये गये। जिसका उदाहरण प्रत्यक्ष दिया जा सकता है। हमें अपने मातृभाषा में कार्य करना भारतीय भोजन को ग्रहण करना स्वदेशी अपनाना अपनी संस्कृति और देश के हित में कार्य करना और प्रत्येक व्यक्ति को मतदान में भाग लेना नितांत आवश्यक है। जब हमारी सोच बदलेगी तो समाज बदलेगा। समाज बदलने से राष्ट्र बदलेगा। बैठक की जानकारी देते हुए सरस्वती शिक्षा मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक  विद्यालय के प्रधानाचार्य व जन शिक्षा के प्रचार तथा मीडिया प्रमुख संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि बैठक के  द्वितीय दिवस के वंदना सत्र में विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री  हेमचंद्र  काशी प्रांत के संगठन मंत्री डॉ राम मनोहर  जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश के प्रदेश मंत्री अनुग्रह नारायण मिश्र काशी प्रांत के सह विभाग प्रचारक ओम प्रकाश जी जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक  राज बहादुर दीक्षित कानपुर प्रांत के प्रदेश निरीक्षक अयोध्या प्रसाद मिश्र संस्कृत वोध परियोजना के प्रमुख राजकुमार सिंह काशी संभाग के संभाग निरीक्षक वीरेंद्र सिंह प्रयाग के संभाग निरीक्षक  कमलेश  विद्यालय के प्रबंधक ओंकार नाथ शुक्ला के द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन पुष्पर्चन एवं वंदना संपन्न हुआ। प्रदेश निरीक्षक  द्वारा अतिथि महानुभावों का परिचय कराया गया। तत्पश्चात क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद्र जी ने गत सत्र की योजना पर चर्चा करते हुए वर्तमान सत्र की योजना पर अनेक बातें बतायीं । उन्होंने कहा  कि टीम बनाकर योजना बनाई जाए। पूरे सत्र भर के कार्यों की योजना प्रधानाचार्य को बनाना चाहिए। व्यक्ति को सफल होने के लिए योजना बनाना आवश्यक है। बैठक में प्रदेश भर से आए हुए 90 प्रधानाचार्यों की उपस्थित रही। उन्होंने कहा कि एक कुशल प्रधानाचार्य की जेब में सदैव डायरी होनी चाहिए उसके मन में कार्यों के प्रति योजनाएं चलती रहे और वह डायरी में लिपिबद्ध होती रहे । क्या-क्या योजना करना है इसके बारे में अपने टिप्स दिए। अपने पंच प्राण पंचकोश आधारभूत विषय पर कुछ बातें बताई। विद्यालय के आधारभूत विषय- शारीरिक शिक्षा संस्कृत शिक्षा संगीत शिक्षा योग शिक्षा नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा ये पांच आधारभूत विषय बताए। विद्यालय के पंच प्राण-भैया/ बहन छात्र प्रबंध समिति अभिभावक एवं पूर्व छात्र हैं। उन्होंने कहा कि खेल-खेल में शिक्षा शिशु वाटिका में अवश्य करें। शिशु वाटिका की शिक्षा joyful learning होनी चाहिए। पूर्व छात्र के विकास की योजना भी बनाना चाहिए। अटल टिंकरिंग लैब का उद्देश्य भैया/ बहनों के अंदर वैज्ञानिक विकास विकसित करना, समाज का विकास करना बताया। और कहा कि विद्यालय का गुणात्मक विकास होगा तभी विद्यालय विकसित होगा इसके लिए भैया/ बहनों को प्रतियोगिता में स्थान लाना संस्कार युक्त बालक का निर्माण करना बालकों का शैक्षिक उन्नयन करना बालक में अनुशासन का विकास करना विद्यालय में कुशल आचार्य की टोली होना और विद्यालय का परीक्षा फल अच्छा आना। इन सब विधाओं से विद्यालय का गुणात्मक विकास संभव है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कैसे हो इसके लिए उन्होने बताया कि आचार्य हमारा दक्ष हो आचार्य का ज्ञान अच्छा हो विषय वस्तु को रखने की क्षमता हो कुशलता हो आचार्य बाल केंद्रित हो क्रिया आधारित पंचपदीय शिक्षण करने की क्षमता हो खेल-खेल में शिक्षण करना सहायक सामग्री का उपयोग करना आदि के आधार पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षण किया जा सकता है। विद्यालय के लिए आवश्यक संसाधन विज्ञान आधारित उपकरण कुशल शिक्षण विज्ञान प्रयोगशाला स्मार्ट कक्षा डिजिटल बोर्ड सहायक सामग्री पर आधारित शिक्षण माशांत में अध्यापकों का प्रशिक्षण खेल सामग्री तथा टी एलएम  होना नितांत आवश्यक है ।भैया बहनों में संस्कार विकसित करने के लिए हमेशा उनमें नैतिकता का विकास करना अच्छी-अच्छी बातें बताना प्रेरक प्रसंग के द्वारा समझाना चाहिए। स्व अपनाना अर्थात स्वच्छता स्वदेशी स्वभाषा स्वास्थ्य स्वावलंबन स्वदेश आदि अपनाना अति आवश्यक है।

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