सदैव प्रकृति के हितार्थ हो हमारा आचरण - कृष्ण मोहन
न्यू गीतांजलि टाइम्स सुल्तानपुर। प्रकृति के प्रति हम श्रद्धा भाव रखें। सदैव यह ध्यान रहे कि हमारा आचरण प्रकृति के विरुद्ध न हो। हमें यह प्रण लेना चाहिए कि भले ही हमारे प्राण चले जाय पर हमारे कारण प्रकृति का नुकसान न हो । यह बातें पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के काशी प्रांत प्रभारी कृष्ण मोहन ने कहीं।उन्होंने शहर के एक निजी प्रतिष्ठान पर प्रेस वार्ता कर ये बातें कही। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि विभाग सुल्तानपुर के संयोजन में प्रकृति के संरक्षण हेतु प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। वार्ता में कृष्ण मोहन ने कहा कि वृक्ष प्राकृतिक सौंदर्य के देवता हैं ।इन्हें संरक्षित करना हमारा दायित्व है।उन्होंने आगे कहा कि प्रकृति की सुरक्षा हेतु जल संरक्षण आवश्यक है।उनके द्वारा प्राकृतिक रंगों के बारे में चर्चा की गई।आने वाले दिनों में होली का पर्व है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाली वस्तुओं को होलिका दहन में न जलाया जाए।गोबर की बनी कंडी का ही होलिका दहन में उपयोग किया जाय।पुराने समय में इन्हीं से होलिका दहन किया जाता था।इससे वातावरण शुद्ध रहता है। प्रकृति में ऑक्सीजन का बढ़ावा देना चाहिए न कि कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़त हो। हमे आगे के भविष्य के लिए शुद्ध वायु की जरूरत होगी और इसके लिए आवश्यक है कि हम सभी अपनी अपनी जिम्मेदारी समझे। प्रकृति को दूषित होने से बचाने में अपना योगदान दें और लोगों को जागरूक करें।अंतिम में उनके द्वारा बताया गया कि शुद्ध वायु और वायरस मुक्त पर्यावरण के लिए वैदिक होली मनाई जाए। इस अवसर पर सौरभ सी ए विष्णु प्रकाश वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल सिंह राकेश तिवारी उमेश तिवारी अंकित राय राज देव शुक्ल संतोष पाण्डेय रामजी विश्वकर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।


