हिंदू धार्मिक ग्रंथ लिंग पुराण में अनुसूचित वर्ग के सफाई कर्मियों के पूजन का है शास्त्रीय विधान - श्रीराजेन्द्रदास महाराज

 हिंदू धार्मिक ग्रंथ लिंग पुराण में अनुसूचित वर्ग के सफाई कर्मियों के पूजन का है शास्त्रीय विधान - श्रीराजेन्द्रदास महाराज

न्यू गीतांजलि टाइम्स सुल्तानपुर। सनातन हिन्दू धर्म के  दलित समाज के विचारकों का सीधा आरोप है कि समाज में ऊंची जातियों द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मनुष्यों के प्रति असमानता ,भेद-भाव होता है। उन्हें अपने से निम्न कोटि का समझा जाता है ये धारणा सभ्य मानव समाज के लिए एक कलंक है। पिछले दिनों एक महान संत द्वारा पुराणों में वर्णित एक ऐसे प्रसंग का रहस्योद्घाटन किया गया जो कि हिंदू धर्म के अनुयायियों को हजारों साल से पता ही नहीं था। पवित्र पर्व होली के पूर्व श्री राजेन्द्र दास महाराज मलूक पीठ वृंदावन के आफियसल यू ट्यूब चैनल पर बागेश्वर धाम के विश्व प्रसिद्ध संत पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के द्वारा आयोजित चतुर्थ बुंदेलखंड महाकुंभ बागेश्वर धाम तीर्थ के मंच पर दर्जनों विद्वानों और हजारों लाखों जनता की उपस्थिति में दिये उद्बोधन का एक छोटा अंश प्रसारित किया गया जिसमें उन्होंने रहस्योद्घाटन किया कि लिंग पुराण में स्वपच् स्पर्श का वर्णन है जिसके अनुसार ब्राह्मणों के साथ साथ क्षत्रिय वैश्य वर्णों को स्पष्ट निर्देश है कि होली के दूसरे दिन अपने क्षेत्र‌ के सफाईकर्मियों को बुला कर उन्हें अबीर का तिलक लगाएं और पूजा करके उन्हें सम्मानित करें और उन्हें वस्त्र द्रव्य दक्षिणा प्रदान करें और उन्हें गले लगायें। इसकी पुण्य फल श्रुति है कि ऐसा करने वाले को देव पूजन का फल प्राप्त होगा और उसकी वर्ष पर्यन्त अरिष्टों से रक्षा होती है। श्री राजेन्द्र दास जी महाराज लिंग पुराण में वर्णित इस विधान का स्वयं पालन करते हैं और उन्होंने देश भर के ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य समाज को होली उपरान्त इस विधान का पालन करने का आह्वान किया है। श्री राजेन्द्र दास जी महाराज के आह्वान से प्रेरित होकर मधुवन स्वीट्स परिवार ने बढ़ैयाबीर सभासद प्रवीण मिश्रा के सहयोग से क्षेत्र के महिला पुरुष सफाई कर्मियों को अपने आवास बढ़ैयाबीर पर बुला कर घर की महिलाओं द्वारा महिला सफाई कर्मियों और पुरुष सफाई कर्मियों को स्वयं पत्रकार एकता संघ के राष्ट्रीय प्रभारी डी पी गुप्ता एडवोकेट व राजन गुप्ता ने पूज्य भाव से अबीर तिलक लगाकर माल्यार्पण कर सम्मानित किया तत्पश्चात उन्हें अंग वस्त्र, मिष्ठान्न व दक्षिणा प्रदान किया गया। अंत में राम नाम विजय मंत्र का सामूहिक कीर्तन किया गया क्योंकि संत तुलसीदास जी ने विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थ राम चरित मानस में राम नाम की महिमा लिखते हुए अयोध्या काण्ड के दोहा नं 194 में वर्णित किया है कि "स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर कोल किरात। रामु कहत पावन परम होत भुवन बिख्यात"॥ अर्थात जिन्हें दुनिया निम्न वर्ण का समझती है ऐसा मनुष्य भी राम नाम कहते ही परम पवित्र हो जाता है और त्रिभुवन में देवताओं के बीच सम्मान सहित विख्यात हो जाता है। इसमें संशय नहीं है। इस प्रकार ये तथ्य स्थापित हुआ कि सर्वोच्च धार्मिक ग्रंथ लिंग पुराण व राम चरित मानस की माने तो दलित समाज को भी पूज्यनीय व सम्मानीय माना गया है और जो व्यक्ति अपनी संकीर्ण मानसिकता व अंहकार वश ऐसे धार्मिक विधान का उल्लघंन करते हुए दलित समाज को यथा उचित सम्मान नहीं देता तो वो हिन्दू धर्म ग्रंथों में वर्णित विधान के विरुद्ध आचरण का दोषी होता है।

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