जीएसटी ऐसा कसाईबाड़ा है जहां बनिया व्यापारी काटे जाते हैं - अग्निवीर के साथ इस पर भी हो पुनर्विचार
अपने मूल वोटर वैश्य समुदाय को हैरान कर वसूले गये करोड़ों-अरबों रूपये टैक्स से जिनका तुष्टिकरण किया गया वहां से एक प्रतिशत वोट नहीं ला पायी बीजेपी डी पी गुप्ता
सुलतानपुर, न्यू गीतांजलि टाइम्स। एनडीए की सरकार बनने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथग्रहण से बीजेपी के परंपरागत वोटर वैश्य व्यापारियों में सबसे ज्यादा खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी। पूरे देश के 25 करोड़ वैश्य समुदाय ने एक दूसरे को बधाई देकर खुले मन से हर्ष प्रकट किया था। जीएसटी की तकनीकी खामियों के चलते लगातार उत्पीड़ित होने के बावजूद बीजेपी के कोर वोटर बनिया व्यापारियों ने नरेन्द्र मोदी और भाजपा का साथ नहीं छोड़ा । परंतु वरिष्ठ समाजसेवी पत्रकार डी पी गुप्ता एडवोकेट ने कहा कि व्यापारियों में इस बात की बहुत ग्लानि है कि दूसरी पार्टी के वोटरों को लुभाने के चक्कर में अब बीजेपी उनके साथ सौतेला व्यवहार करने लगी है। बार बार मांग करने के बावजूद जीएसटी का सरलीकरण नहीं किया जा रहा है। जीएसटी लागू करने के अगले दो-तीन वर्षों तक उसमें हजारों संशोधन हुए। कोई भी टैक्स परामर्शदाता तब, उसे पूरी तरह समझ नहीं पाया था और उस दौरान हुई गलतियों पर आज नोटिस जारी कर न केवल टैक्स लगाया जा रहा बल्कि उस पर पिछले पांच साल का भारी ब्याज भी वसूला जा रहा है।व्यापारियों को टैक्स से ज्यादा उस पर लिया जा रहा भारी ब्याज दुखी कर रहा है। विदित हो कि पिछले कई सालों से भारतीय जनता पार्टी अपने सबसे पुराने और परंपरागत वोटर वैश्य व्यापारी समुदाय को रीलीफ पहुंचाने की बजाय उससे हर तरफ से टैक्स वसूल कर दूसरी पार्टी के वोटरों को खुश करने में ही लगी रही। ये हास्यास्पद है कि जिन वोटरों पर करोड़ों अरबों रुपए लुटा कर उन्हें खुश करने का प्रयास किया गया वहां से एक प्रतिशत भी वोट नहीं ला पाई बीजेपी और हर तरफ बुरी तरह से हार गई। कांग्रेस ने जितना तुष्टिकरण साठ वर्षों में नहीं किया उससे कहीं अधिक तुष्टिकरण भाजपा ने मात्र दस वर्षों में कर डाला है। किसानों ने उग्र आंदोलन किया तो नया कृषि कानून रद्द कर दिया। इधर एनडीए के सहयोगी दलों ने दबाव बनाया तो मोदी सरकार अब अग्नि वीर योजना पर भी पुनर्विचार कर रही है। अयोध्या में मिली भारी हार के बाद अब वहां मनमाने ढंग से बुलडोजर चलाने पर भी रोक लगा दिया गया है परंतु चिराग तले अंधेरा वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए भाजपा अपने मूल परंपरागत वोटर वैश्य समुदाय की लगातार उपेक्षा करते हुए उनसे अधिक से अधिक टैक्स वसूलने के लिए नित नये नये हथकंडे अपना रही है। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब बीजेपी को समझ लेना चाहिए कि अपने परम्परागत कोर वैश्य व्यापारी वोटरों की उपेक्षा न करे और जीएसटी पर पुनर्विचार करते हुए उसे व्यावहारिक रूप से लचीला और सरल बनाये। 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा को अभी से सावधान हो जाना चाहिए और आयातित साइबेरियन नेताओं की बजाय पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं और अपने कोर वोटरों को सम्मान देने की आदत डाल लेनी चाहिए।
