सुल्तानपुर: प्रॉपर्टी डीलर का शव बाग में मिला
पोस्टमार्टम में जहर से मौत की पुष्टि, बेटे ने रात में जाने से रोका था
सुल्तानपुर में एक प्रॉपर्टी डीलर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में कोतवाली देहात के उचहरा गांव स्थित एक बाग में मिला है। मृतक की पहचान भपटा निवासी 45 वर्षीय शिवकुमार गुप्ता के रूप में हुई है।
शिवकुमार गुप्ता हनुमानगंज के असई चौराहे पर अपने परिवार के साथ रहते थे। वह प्रॉपर्टी के काम के साथ-साथ असई चौराहे पर किराना, बर्तन और फल की दुकान भी चलाते थे, जिसकी देखरेख उनकी पत्नी करती थीं।
मृतक के छोटे बेटे सनी गुप्ता ने बताया कि घटना वाली रात उनके पिता दादाजी के लिए किराना दुकान से दूध और बिस्किट लाए थे। उन्होंने अपनी बहन से रोटी बनाकर रखने को कहा था और बताया था कि वे एक घंटे में लौट आएंगे।
सनी के अनुसार, उनके पिता जबरदस्ती गाड़ी की चाबी लेकर गए, जबकि वे उन्हें रात में बाहर जाने से मना कर रहे थे। सुबह पड़ोसियों के फोन से उन्हें पिता की हत्या की जानकारी मिली। सनी ने बताया कि उनके पिता प्रॉपर्टी के काम के बारे में कुछ नहीं बताते थे, इसलिए उन्हें किसी पर शक नहीं है।
शिवकुमार का शव घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर भपटा और पाठक पुरवा गांवों के बीच एक बाग में मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर अखंडदेव मिश्रा ने बताया कि तहरीर मिलने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिवकुमार अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। उनके दो बेटे और एक बेटी है। बड़े बेटे सुमित कुमार गुप्ता की शादी 28 नवंबर 2024 को हुई थी और वह दिल्ली में नौकरी करते हैं। घटना के बाद से पत्नी सुमन गुप्ता, बेटी शिवानी गुप्ता और पिता राम सिंगार गुप्ता का रो-रोकर बुरा हाल है।
बड़े भाई अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि मेरे भाई के साथ जो घटना हुई इस सम्बन्ध में हम बहुत ज़्यादा नहीं बता सकते। इसलिए की भाई हनुमानगंज में रहता था और हम तीन किमी दूर भपटा में रहते हैं। सुबह हम गांव में खेत में काम कर रहे थे तब हमें पता चला की भाई के साथ ये घटना घटी। घटनास्थल पर जब हम पहुंचे तो दो सौ लोगों की भीड़ लगी थी। कब निकले घर से, घटना कैसे घटी ये उनका लड़का ही बता सकता है। कोई चोट है नहीं, गाड़ी उनकी मौजूद है मौके पर। क्या किया गया कुछ पता नहीं
शिवकुमार के बड़े भाई अशोक गुप्ता एक शिक्षा मित्र हैं। शिवकुमार हनुमानगंज के एक स्वयं सहायता समूह का भी सदस्य था, जहां से उसने ऋण लिया था।






