मातृभूमि सेवा संस्था सुल्तानपुर में आज जिला पंचायत के प्रांगण में देश के अमर शहीदों को माल्यार्पण कर दुर्गा भाभी की जयंती मनाई। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष डॉ अजय कुमार तिवारी ने दुर्गा भाभी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि देश की आजादी की लड़ाई के लिए अनेकानेक महिलाएं स्वयं आगे बढ़कर अपना बलिदान किया था। झांसी की रानी, अहिल्या बाई और कई दमदार व्यक्तित्व की महिलाओं की जाबांजी का भारतीय इतिहास गवाह है। इन महिलाओं में एक नाम और भी शामिल हैं, दुर्गावती का। दुर्गावती देवी जिनको हम दुर्गा भाभी के नाम से जानते हैं, वह भले ही भगत सिंह, सुख देव और राजगुरू की तरह फांसी पर न चढ़ी हों लेकिन कंधें से कंधा मिलाकर आजादी की लड़ाई लड़ती रहीं।
स्वतंत्रता सेनानियों के हर आक्रमक योजना का हिस्सा बनी। दुर्गा भाभी बम बनाती थीं तो अंग्रेजो से लोहा लेने जा रहे देश के सपूतों को टीका लगाकर विजय पथ पर भी भेजती थीं।
दुर्गा भाभी को भारत की 'आयरन लेडी' भी कहा जाता है।
*बहुत ही कम लोगों को ये बात पता होगी कि जिस पिस्तौल से चंद्र शेखर आजाद ने खुद को गोली मारकर बलिदान दिया था, वह पिस्तौल दुर्गा भाभी ने ही आजाद को दी थी।* इतना ही नहीं दुर्गा भाभी एक बार भगत सिंह के साथ उनकी पत्नी बन कर अंग्रेजो से बचाने के लिए उनके प्लान का हिस्सा बनी थीं। दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 को हुआ था। दुर्गा भाभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रमुख सहयोगी थीं।
प्रांतीय अध्यक्ष श्री अशोक श्रीवास्तव ने लोगों से अपील की कि देश की स्वाधीनता में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले इन शहीदों को हमें याद करके लोगों तक उनके योगदान को पहुंचना ही ऐसे कार्यक्रम की वास्तविक सार्थकता होगी ।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के प्रोफेसर अखिलेश तिवारी जी ने अपने उद्बोधन में देश के बलिदानियों खासकर दुर्गा भाभी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम भाग्यशाली और धन्य हैं कि हमारे पूर्वज इतने महान थे। इस कार्यक्रम में श्री शिव मूर्ति पांडे,अनिल श्रीवास्तव ,धर्मेंद्र द्विवेदी, कौशलेंद्र शुक्ला,गिरजा प्रसाद श्रीवास्तव, वीरेंद्र भार्गव, राधेश्याम पांडे ,विजय सिंह, राजेश कुमार आदि लोग उपस्थित थे।
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