माइक्रो टीचिंग तकनीक से शिक्षक को शिक्षण कौशल सिखाया जाता है- डॉ भारती सिंह

 माइक्रो टीचिंग तकनीक से शिक्षक को शिक्षण कौशल सिखाया जाता है- डॉ भारती सिंह

न्यू गीतांजलि टाइम्स सुल्तानपुर। राणा प्रताप पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के बी. एड. विभाग द्वारा सूक्ष्म शिक्षण  का आयोजन बी. एड. प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों हेतु किया गया। सूक्ष्म शिक्षण समापन समारोह को संबोधित करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ भारती सिंह ने कहा कि माइक्रो टीचिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें एक शिक्षक को शिक्षण कौशल सीखने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इस तकनीक में, शिक्षक को वास्तविक जीवन की स्थिति में रखा जाता है, जिसमें उनके कौशल विकसित होते हैं और उन्हें विषय वस्तु की गहरी समझ प्राप्त होती है। विभाग द्वारा पाँच सूक्षम शिक्षण कौशल का अभ्यास कराया गया। असिस्टेंट प्रोफेसर शांतिलता कुमारी ने कहा कि सूक्षम शिक्षण एक शिक्षक प्रशिक्षण और संकाय विकास तकनीक है जिसके तहत शिक्षक एक शिक्षण सत्र की रिकॉर्डिंग की समीक्षा करता है, ताकि साथियों / छात्रों से रचनात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त की जा सके कि क्या काम किया है और उनकी शिक्षण तकनीक में क्या सुधार किए जा सकते हैं। डॉ सीमा सिंह ने कहा कि  माइक्रोटीचिंग, एक शिक्षक प्रशिक्षण तकनीक जो वर्तमान में दुनिया भर में प्रचलित है, शिक्षकों को शिक्षण कौशल कहे जाने वाले विभिन्न सरल कार्यों में सुधार करके अपने शिक्षण कौशल को बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है। डॉ संतोष अंश ने कहा कि सूक्ष्म-शिक्षण में शिक्षण-कौशल, पाठ्यवस्तु तथा कक्षा अनुशासन आदि कक्षा के हर पक्ष को सरल किया जा सकता है। इसमें व्यवहारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाता है। इसीलिये वांछित परिवर्तनों तक इस प्रविधि द्वारा शीघ्र पहुँचा जा सकता है। पाठ के तुरन्त बाद ही छात्राध्यापक को पृष्ठपोषण (फीडबैक) मिल जाता है। यह शिक्षकों में आत्मविश्वास बनाये रखता हैं। इसमें अधिक नियन्त्रण और नियंत्रित शिक्षण अभ्यास शामिल है। सूक्ष्म शिक्षण से प्रभावी शिक्षण अभ्यास तथा प्रभावी शिक्षक तैयार किये जाते हैं। यह कक्षा का समय, कक्षा का अनुशासन कक्षा का आकार जैसे समस्याओं को कम करता है। यह विभिन्न प्रकार के कौशल आत्मसात करने में सहायक हैं। इस प्रकार सूक्ष्म शिक्षण एक शिक्षक प्रशिक्षु को बेहतर बनाने में अपनी प्रमुख भूमिका निभाता हैं. साथ-ही-साथ शिक्षण को प्रभावशाली बनाता हैं तथा शिक्षार्थियों में विशिष्ट कौशल को बढ़ाता हैं। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने सूक्षम  शिक्षण को लेकर अपने अनुभव भी साझा किये। कार्यक्रम का संचालन कनक द्विवेदी यशस्वी गुप्ता राम प्रवेश कौशल सौरभ निषाद ने किया।

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