समाजशास्त्र विभाग द्वारा "सामाजिक न्याय" विषय पर व्याख्यान आयोजित

समाजशास्त्र विभाग द्वारा "सामाजिक न्याय"  विषय पर व्याख्यान आयोजित


सुलतानपुर, न्यू गीतांजलि टाइम्स     कमला नेहरू संस्थान के समाजशास्त्र विभाग द्वारा आज दिन शनिवार को " सामाजिक न्याय " विषयक व्याख्यान का आयोजन हुआ। यह आयोजन डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के पूर्व अवसर पर सम्पन्न किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता संस्थान के उपप्राचार्य प्रोफेसर राधेश्याम सिंह नें कहा कि सामाजिक  न्याय मात्र एक यूटोपिया है । वह आज तक केवल  मात्र गुण दोष की व्याख्या के आधार पर  सामाजिक न्याय की व्याख्या करता है । सभ्य मनुष्य काल्पनिक तौर पर समाज का चिंतन करता है  वह धरातल पर कितना आत्मसात होता है यह समय काल और परिस्थिति पर निर्भर रहता है । इन्होंने बताया कि वर्तमान समय में सामाजिक न्याय की अवधारणा बदलते हुए विविध समूह की महत्वाकांक्षा के आगे अपनी परिणिति को प्राप्त करने में उतना सफल नहीं हो सका जितना बुद्धिजीवी परिकल्पना करते थे ।आज जहां वृद्धों, प्रवासियों, ट्रांसजेंडर, लिविंग रिलेशनशिप आदि की समस्या  ने सामाजिक न्याय के लिए नई चुनौतियां पेश की हैं । वहीं विविध समस्याओं में सामाजिक न्याय की अवधारणा मात्र स्वप्नलोक बनके रह गई है। आज नारी मुक्ति के लिए सामजिक न्याय की मांग करने वाले आंदोलन विकृत होकर यौन मुक्ति की मांग कर रहा है। वहीं सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय का सिद्धांत अपने-अपने समूहों के स्वहित हेतु संकल्पबद्ध है ।आज सामाजिक न्याय की अवधारणा सहानुभूति और आत्मनुभूति की दो धारा के बीच में फस गई है । बिना सामाजिक व्यहार के सामाजिक न्याय का मार्ग कभी भी प्रशस्त नही होगा। इस अवसर पर जयभद्र सिंह सत्यम  मो सरफराज आशीष पांडे  महीन रेशमा व रुचि ने अपना विचार व्यक्त किया । संगोष्ठी में मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ अतुल कुमार मिश्रा व डॉ नीतू सिंह सहित नीरज सिंह ने सम्बोधित किया। समाजशास्त्र  विभागाध्यक्ष डॉ कुलदीपक पांडे ने सभी वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय को प्राप्त करने के समाज को स्व स्फूर्त होकर आगे आना हो तभी एक विकसित और अग्रणी समाज का निर्माण संभव है।

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