शिक्षामंत्री शिक्षामित्रों से झूठी हमदर्दी न दिखाएँ

शिक्षामंत्री शिक्षामित्रों से झूठी हमदर्दी न दिखाएँ


 हमें हमारा सम्मान वापिस करके साबित करें हमदर्दी-दिनेश चंद्रा

सुल्तानपुर-विधानसभा सत्र के दौरान विधायक समर पाल सिंह नौगवां सादात अमरोहा ने उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों में 2000 से कार्यरत 172000 शिक्षामित्रों को इस महंगाई के दौर में मात्र 10000 रूपये मानदेय मिलने की समस्या को उठाया। विधायक ने सदन को बताया कि मंत्री जी के कुत्ते का माह का खर्च 30000 रूपये है तो इस महंगाई के दौर में शिक्षामित्र अपने परिवार की परवरिश कैसे कर पाता होगा। विधायक ने सरकार से सदन के माध्यम से आग्रह किया कि शिक्षामित्रो की समस्या को ध्यान में रखते हुए उन्हें कम से कम 1000 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जाय। जिस पर सदन में उत्तर प्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जवाब देने से पहले शिक्षामित्रों से झूठी हमदर्दी दिखाते हुए विधायक द्वारा दिए गए उदाहरण की निंदा किया। जबकि विधायक द्वारा शिक्षामित्रों की मार्मिक समस्या रखे जाने के दौरान सदन में सभी शिक्षामित्रों की मार्मिक समस्या पर हँसते हुए मज़ाक़ उड़ा रहे थे। बेसिक शिक्षा मंत्री ने मानदेय बढ़ाने की बात को नकारते हुए पहले से और वर्षों से रटा-रटाया वाक्य दोहराया कि हमने शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 से 10000 कर दिया।जबकि मंत्री जी को सच बात कहनी चाहिए कि सरकार ने शिक्षामित्रों का वेतन 40000 से घटाकर 10000 कर दिया है। आपको बता दें कि शिक्षामित्रों को दो चरण 20132014 में बीटीसी प्रशिक्षण कराकर स्नातक शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया गया। उन्हें लगभग 3वर्षो तक वेतन भी दिया गया। समायोजन के दौरान जो शिक्षामित्र इंटर पास थे उन्हें बीटीसी प्रशिक्षण नहीं दिलाया जा सका था उन्हें सरकार द्वारा 10000मानदेय देने का आदेश दिया था। परन्तु न्यायालय द्वारा 2017 में समायोजन निरस्त हो जाने पर सभी शिक्षामित्रों को सरकार ने 10000 मानदेय निश्चित कर दिया। तब से लेकर आज तक सरकार द्वारा शिक्षामित्रों का मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। शिक्षामित्र संगठन ने उत्तर प्रदेश सरकार से मानवीयता के आधार पर आज की इस चरम पर पहुंच चुकी महंगाई को ध्यान में रखकर नैतिकता के आधार पर सम्मानजनक मानदेय देने का आग्रह किया है।आदर्श शिक्षामित्र संगठन के ज़िलाध्यक्ष दिनेश चंद्रा ने वार्ता के दौरान कहा कि कल सदन की कार्यवाही के दौरान शिक्षामंत्री ने हम शिक्षामित्रों से झूठी हमदर्दी दिखाई है अगर सच में उन्हें हम शिक्षामित्रों से हमदर्दी है तो सरकार हमारा सम्मान पुनः वापिस करते हुए हमें सहायक अध्यापक पद पर बहाल करे और जब तक समायोजन न हो तब तक हमें सम्मान जनक मानदेय दिया जाय। हम सभी शिक्षामित्र सरकार द्वारा हमारी समस्या हल न किये जाने तक आंदोलन हेतु तैयार हैं और प्रदेश संगठन के आह्वान पर आगामी 9 अगस्त से प्रदेश के सभी जनपद मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करने हेतु तैयार हैं।

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