महाशिवरात्रि मनाने का जाने धार्मिक व वैज्ञानिक कारण-राजदेव यादव

 महाशिवरात्रि मनाने का जाने धार्मिक व वैज्ञानिक कारण-राजदेव यादव

सुल्तानपुर-वैज्ञानिक रूप से देखें तो महाशिवरात्रि की रात उत्तरी गोलार्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य के शरीर का भीतरी ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर ब्रह्मांड की ओर जाने लगती है मानव प्रकृति स्वयं मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद कर रही होती है।इस रात ग्रह का उत्तरी गोलार्ध इस प्रकार स्थित होता है कि मनुष्य के शरीर में ऊर्जा का प्राकृतिक उभार होता है।एक कैलेंडर वर्ष में होने वाली सभी बारह शिवरात्रियों में से फरवरी मार्च में आने वाली महाशिवरात्रि का सबसे अधिक महत्व आध्यात्मिक है,महाशिवरात्रि साल भर में एक ही बार मनाई जाती है फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।इसीलिए इस पर्व को पार्वती और शिव विवाह के उपलक्ष में मनाया जाता है यानी महाशिवरात्रि साल भर में एक बार तो वही  शिवरात्रि हर महीने मनाई जाती है।महाशिवरात्रि के दिन देश के सभी शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उड़ती है।कई लोग महाशिवरात्रि को ही शिवरात्रि बोलते हैं लेकिन ऐसा नहीं है यह दोनों पर्व अलग-अलग हैं इसके धार्मिक व वैज्ञानिक लाभ भी हैं,वैज्ञानिक महत्व-अब हम बताते हैं आपको वैज्ञानिक महत्व, महाशिवरात्रि की रात ग्रह का उत्तरी गोलार्ध  इस तरह स्थित होता है कि इंसान के अंदर की ऊर्जा अपने ऊपर की तरफ जाने लगती है।यानी की प्रकृति इंसान को आध्यात्मिक शिखर तक जाने में सहायता करती है और व्यक्ति एक सुपर नेचर पावर का एहसास महसूस करता है ताकि इसका लाभ लोगों को मिल सके।इसलिए महाशिवरात्रि की रात्रि में जागरण करने व रीड की हड्डी सीधी करके ध्यान मुद्रा में बैठने की बात कही गई है।आध्यात्मिक महत्व-माना जाता है कि भगवान शिव इस दिन हर एक ज्योतिर्लिंग में स्वयं विद्यमान रहते हैं जो दूर-दूर से आए हुए भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं भक्तों पर भगवान शिव अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं।

Post a Comment

Please Select Embedded Mode To Show The Comment System.*

Previous Post Next Post