समृद्ध पुस्तकालय ही शिक्षको-छात्रों की गुणवत्ता में सहायक होता है
सुलतानपुर, न्यू गीतांजलि टाइम्स। पुस्तक का मानव जीवन में कागज और मुद्रण से पहले का रिश्ता है आदिम काल में मिट्टी की पट्टियों चर्म पत्र, ताम्रपत्र आदि पर ज्ञान का भंडारण प्रथा ही पुस्तकालय के पूर्वज है। अतीत के कालखंडों की गतिविधियों को आगामी पीढ़ी के लिए सुरक्षित और संरक्षित रखा जाता था भंडारण की परंपरा मानव के विवेकशीलता का परिचायक है पुस्तकालय पीढ़ि़यों की परंपराओं से गुजरते हुए उत्तरोत्तर आधुनिकरण के मार्ग पर चलते हुए आज मोबाइल लाइब्रेरी के अद्ययतन युग में प्रवेश किया है। आधुनिक दौर में पुस्तकालय मानव जीवन का अत्यंत आवश्यक अंग बन चुका है। इस परंपरा में कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान जिसकी स्थापना 1972 स्वं. बाबू केदारनाथ सिंह पूर्व केन्द्रीय मंत्री भारत सरकार ने इस मंशा से की थी कि यहाँ शैक्षिक व्यवस्था देने वाले शिक्षक अपने विषयों के विशेषज्ञ हो जिससे शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र छात्र देश-विदेश के उच्च पदों पर आसीन हो। यहाँ के पुस्तकालय का जब हम अवलोकन करते हैं तो संस्थापक की उसी मंशा को फलीभूत करते हुए अपनी दशा और दिशा में आधुनिकीकरण की परम्परा को आत्मसात करते हुए जनपद के अन्य महाविद्यालयों ही नहीं विश्वविद्यालय के पुस्तकालय से भी आगे का सफर तय कर चुकी है। उपयोगियों की परिकल्पनाओं को जीवंत करने का दशा और दिशा केंद्रीय पुस्तकालय अपने सहयोगी पुस्तकालयों के साथ अद्यतन तकनीकी सुविधाओं के साथ संचलित है आज केंद्रीय पुस्तकालय के अंतर्गत 20 पीजी पुस्तकालय और पांच यूजी पुस्तकालय संचालित हैं। इसके साथ ही एक लाख से अधिक विभिन्न विषयों की पुस्तकें डेढ़ सौ से अधिक जर्नल्स, डेलनेट एन-लिस्ट मनुपात्रा व सरकार द्वारा संचालित अन्य ई-रिसोर्सेस की सुविधा हेतु 100 कम्प्यूटरों की संख्या में हमारे पास तीन ई-पुस्तकालय संचालित है। संस्थान अध्यनरत छात्रों के साथ शोध क्षेत्र में कार्य कर रहे शिक्षकों एवं छात्रों तथा बाहर के छात्र जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं उनको भी पुस्तकालय की सुविधाएं दी जा रही है। यह व्यवस्था अन्य किसी महाविद्यालय या जनपदीय पुस्तकालय में नहीं है। पुस्तकालय उन्नतशील बनाने के लिए बेस्ट यूजर अवार्ड जिसमें संस्थान के सभी वर्गों के छात्रों में से जो अधिकतम पुस्तकालय का उपयोग किए हैं तथा वे शिक्षक जो सर्वाधिक पुस्तकालय सामग्रियांे का उपयोग किए हैं उनको पुरस्कृत जाता है। तकनीकी प्रशिक्षण छात्रों एवं शिक्षकों सत्र के शुरूआत में ही कराया जाता है। जिससे की ई-पुस्तकालय का सफल संचालन होता रहे इस व्यवस्था में सर्वाधिक योगदान प्रबंधक विनोद सिंह जिनका उद्बोधन पुस्तकालय के परिपेक्ष्य में सदैव ही रहा समृद्ध पुस्तकालय ही शिक्षको-छात्रों की गुणवत्ता में सहायक होता है उनके पुत्र पुलकित सिंह संस्थान के ऊर्जावान प्राचार्य प्रो. आलोक कुमार सिंह सहित समस्त शिक्षकों जागरूक कर्मचारी के अथक सहयोग से यह पुस्तकालय उत्तर-प्रदेश के प्रतिष्ठित पुस्तकालयों में जाना जाता है। पुस्तकालय प्रभारी के रूप में मैं डॉ. राजेश पाण्डेय आभार प्रकट करता हूं अपने तकनीकी पुस्तकालय प्रभारी श्री सुधीर सिंह एवं समस्त पुस्तकालय कर्मचारी एवं संस्थान परिवार के सभी अन्य सहयोगियों को जिनके प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोग से उन्नतशील पुस्तकालय जनपद में संचालित है।
